By: ABP News Bureau | Updated at : 14 Mar 2017 06:04 PM (IST)
नई दिल्ली: विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मिली भारी जीत ने शेयर बाजार के निवेशकों की झोली भर दी है. अकेले बोम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर निवेश की कीमत यानी मार्केट कैपिटलाइजेशन में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.
बीजेपी की इस शानदार जीत के बाद रुपए की हालत में भी सुधार आया है, करीब साल भर के बाद पहली बार रुपए की वैल्यू फिर से 66 के स्तर के नीचे आ गई है. आज एक डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत 65 रुपये 81 पैसे के करीब रही.
चुनावी नतीजों के आने के बाद पहली बार जब मंगलवार को शेयर बाजार में कारोबार शुरू हुआ तो दोनों ही सूचकांक, बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी, भारी तेजी के साथ खुले. 30 शेयरों वाला सेंसेक्स जहां 500 प्वाइंट से ऊपर था, वहीं एनएसई निफ्टी खुलने के थोड़ी देर बाद ही कारोबार के दौरान अब तक के सबसे ऊंचे स्तर यानी 9122 पर पहुंच गया.
वैसे कारोबार के दौरान कुछ मुनाफावसूली भी हुई. फिर भी सेंसेक्स दो साल के सबसे ऊंचे स्तर यानी 29443 पर बंद हुआ. ये शुक्रवार के मुकाबले करीब 500 प्वाइंट ज्यादा है. दूसरी ओऱ निफ्टी पहली बार नौ हजार के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा. निफ्टी में शुक्रवार के मुकाबले डेढ़ सौ प्वाइंट से भी ज्यादा की तेजी देखने को मिली.
आज बैंकिंग शेयरो में काफी उछाल देखने को मिला. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि उत्तर प्रदेश की नयी सरकार की पहली ही कैबिनेट बैठक में किसानों की कर्ज माफी पर फैसला होगा. चूंकि किसानों के कर्ज के डूबे कर्ज मे तब्दील होने की खासी आशंका रही है और कर्ज माफी की सूरत में सरकार से पैसा मिल जाएगा, इसीलिए बैंकों में लोगों ने जमकर खरीदारी की.
आपको बता दें कि बिजली समेत बुनियादी क्षेत्र की विभिन्न कंपनियों में भी निवेशकों ने गहरी दिलचस्पी ली, क्योंकि उम्मीद की जा रही है कि नई सरकार बड़े पैमाने पर बुनियादी सुविधाओं के लिए खर्च करेगी.
बाजार में तेजी का असर ये था कि बीएसई पर मंगलवार को जिन 3045 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ, उसमे निवेश की कीमत यानी मार्केट कैपिटलाइजेशन 1 करोड़ 17 लाख 31 हजार 6 सौ 59 रुपये से बढ़कर 1 करोड़ 18 लाख 87 हजार 73 रुपये पर पहुंच गया. यानी एक ही दिन में निवेशकों को एक लाख 55 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का फायदा हुआ.
बाजार को उम्मीद है कि चुनावी नतीजों के आने के बाद आर्थिक सुधारों को रफ्तार मिलेगा. साथ ही अगले साल तक राज्य सभा में सत्तारुढ दल को बहुमत मिलने के आसार हैं जिससे महत्वपूर्ण आर्थिक विधेयक अटकेंगे नहीं. फिलहाल, अब सभी की नजर मगंलवार को फेडरल रिजर्व की बैठक पर है. बैठक में ब्याज दर बढ़ाने पर फैसला हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो अमेरिकी बाजार में ज्यादा कमाई होने की उम्मीद में विदेशी निवेशक यहां से पैसा निकालेंगे. इससे शेयर बाजार में कुछ कमजोरी दिख सकती है.
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